भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लिए टिकाऊ और कारगर विद्युत क्षेत्र पहली आवश्यकताः विद्युत मंत्री

विद्युत और नवीन तथा नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री श्री आर.के. सिंह ने आज गुजरात के नर्मदा जिले के टेंट सिटी में राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों के विद्युत तथा नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन का उद्घाटन किया। दो दिन के इस सम्मेलन में राज्यों के ऊर्जा मंत्री तथा शीर्ष अधिकारी भाग ले रहे हैं। सौभाग्य योजना के अंतर्गत घरों के लगभग सार्वभौमिक विद्युतीकरण के लक्ष्य की प्राप्ति के बाद यह पहला सम्मेलन है। सौभाग्य योजना के अंतर्गत रिकॉर्ड १६-१७ महीनों में २६.६ मिलियन घरों को विद्युतिकृत किया गया।

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए केन्द्रीय विद्युत मंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि दी और कहा कि ५०० से अधिक रजवाड़ों को भारत में विलय करने के लिए देश उनका ऋणी है। विद्युत क्षेत्र की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सभी के लिए २७3७ विद्युत आपूर्ति करने वाले टिकाऊ और कारगर विद्युत क्षेत्र के बिना विकसित देश नहीं बन सकता।

श्री सिंह ने कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भारतीय विद्युत क्षेत्र निवेश आकर्षित करें। यह तभी होगा, जब कारोबारी सुगमता हो और संविदा का उल्लंघन न हो। उन्होंने विद्युत उत्पादकों को बिजली वितरण कंपनियों द्वारा समय से भुगतान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

विद्युत मूल्यों को स्पर्धी और किफायती बनाने की आवश्यकता पर बल देते हुए विद्युत मंत्री ने कहा कि प्रणाली की खामियों का बोझ साधारण जन पर नहीं थोपा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता संपन्न सेवा उपभोक्ताओं का अधिकार है।

विद्युत नुकसान में कमी तथा बिलिंग और संग्रह क्षमता के लिए विद्युत मंत्री ने स्मार्ट प्रीपेड मीटर अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर गरीबों के हित में है, क्योंकि इसमें एक ही समय पूरे महीने के बिल का भुगतान करने के लिए उपभोक्ता को बाध्य नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि इससे बिल भुगतान सुगमता होती है और बिजली की चोरी की संभावना कम होती है। उन्होंने सभी राज्यों से प्राथमिकता के आधार पर सभी सरकारी विभागों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का आग्रह किया।

श्री आर.के. सिंह ने जलवायु परिवर्तन की चर्चा करते हुए कहा कि यह वैश्विक चिंता का विषय है और भारत सभी संभव तरीके से जलवायु परिवर्तन की समस्या के समाधान के लिए संकल्पबद्ध है। कुसुम योजना की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यह योजना आने वाले वर्षों में इस योजना से सौर ऊर्जा से कृषि पम्प चलेंगे। इससे न केवल राज्यों का सब्सिडी बोझ कम होगा, बल्कि किसानों को भी लाभ होगा और किसान आवश्यकता से अधिक बिजली सरकार को बेचेंगे। इससे किसानों को भूजल के न्यायोचित उपयोग के लिए प्रोत्साहन मिलेगा और बिजली की बचत होगी, क्योंकि किसान आवश्यकता से अधिक बिजली सरकार को बेचकर मुद्रा अर्जित करेंगे।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए विद्युत सचिव श्री सुभाष गर्ग ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत किया और दो दिन के इस सम्मेलन में विचार किए जाने वाले विषयों पर प्रकाश डाला।

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा सचिव श्री आनंद कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन भारत के लिए संकल्प का विषय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत दिसंबर, २०२२ से पहले १७५ गीगा वॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री के संयुक्त राष्ट्र संबोधन में ४५० गीगा वॉट के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की घोषणा का भी उल्लेख किया।

दो दिन के इस सम्मेलन में सभी के लिए २४3७ विद्युत आपूर्ति, कारोबारी सुगमता, संविदा की पवित्रता, नियामक विषयों, पीएम-कुसुम, सृष्टि, डीडीयूजीजेवाई, आईपीडीएस योजनाओं के क्रियान्वयन, अल्ट्रामेगा नवीकरणीय ऊर्जा पार्कों की स्थापना, ट्रांसमिशन और ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी।

सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर केन्द्रीय विद्युत मंत्री द्वारा राज्य की विद्युत वितरण कंपनियों की ७वीं वार्षिक एकीकृत रेटिंग जारी की गई। २२ राज्यों की ४१ वितरण कंपनियों की रेटिंग की गई है, जिसमें से सात कंपनियों को ए + की रेटिंग प्राप्त हुई है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष २२ वितरण कंपनियों का उन्नयन किया गया है।